शंका से मेरी राह शुरू हुई। प्रश्न पूछते-पूछते मन थका नहीं, खुला। नास्तिकता ने मुझे ईमानदार नजर दी।
फिर मौन में उत्तर मिले। करुणा, साहस, और कृतज्ञता ने विश्वास का दीया जलाया। अब हर सांस में अर्थ है। खोजिए, महसूस कीजिए, आगे बढ़िए।
शंका से मेरी राह शुरू हुई। प्रश्न पूछते-पूछते मन थका नहीं, खुला। नास्तिकता ने मुझे ईमानदार नजर दी।
फिर मौन में उत्तर मिले। करुणा, साहस, और कृतज्ञता ने विश्वास का दीया जलाया। अब हर सांस में अर्थ है। खोजिए, महसूस कीजिए, आगे बढ़िए।