भारत में ‘लॉर्ड’: प्रभु से प्रभुत्व, करुणा की धारा। भक्ति हमें मर्यादा, धैर्य और हित सिखाती है। तभी शक्ति का अर्थ सेवा और संरक्षण बनता है।
प्रभुत्व सार्थक तब है, जब पहले स्व-नियंत्रण हो। पद नहीं, कर्म सम्मान देते हैं। संकल्प लें: ज्ञान, करुणा, न्याय से नेतृत्व करें।