गीता के कृष्ण कहते हैं: कर्म करो, फल की चिंता छोड़ो। समभाव रखो; सफलता-असफलता दोनों गुरु हैं। मन को संभालो, सांस में ठहराव लाओ।
दूसरों से करुणा, खुद से अनुशासन रखो। संवाद साफ रखो, भय नहीं, जिम्मेदारी चुनो। आज से कर्म, धैर्य, और प्रेम अपनाएं; जीत निश्चित है।