शांत बैठें, रीढ़ सीधी रखें। धीमे श्वास लें, ‘ॐ नमः शिवाय’ मन में जपें। ध्यान को हृदय पर टिकाएं, प्रकाश की कल्पना करें।
विचार आएं तो मुस्कान से जाने दें। करुणा और निर्भयता को महसूस करें—यही शिवत्व है। आज से रोज़ पाँच मिनट दें; भीतर का शिव जागेगा।
शांत बैठें, रीढ़ सीधी रखें। धीमे श्वास लें, ‘ॐ नमः शिवाय’ मन में जपें। ध्यान को हृदय पर टिकाएं, प्रकाश की कल्पना करें।
विचार आएं तो मुस्कान से जाने दें। करुणा और निर्भयता को महसूस करें—यही शिवत्व है। आज से रोज़ पाँच मिनट दें; भीतर का शिव जागेगा।