संदेह से श्रद्धा तक का सफर

संदेह मन में उठता है, आवाज़ें उलझन बढ़ाती हैं, हम ठहरते, देखते, पूछते, छोटे प्रयोग से राह दिखती, सत्य की किरण हौसला देती।

हर छोटा सच भरोसा बनता, धैर्य से कदम स्थिर होते, अनुभव मुस्कुराता, श्रद्धा खिलती, दिल हल्का होता, दृष्टि साफ, आज पहला कदम बढ़ाइए; बदलेंगे कल।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top