जगन्नाथ पुरी से शुरू होती यात्रा, रथयात्रा की गूंज, महाप्रसाद की सुगंध। मथुरा-वृंदावन के कीर्तन, अयोध्या की रामभक्ति। हर कदम पर लोक-संस्कृति खिलती।
तिरुपति तक पहुँचकर वैंकटेश की करुणा, आलवारों का भावगीत, सेवा-दान की परंपरा। संदेश: यात्रा मन को जोड़ती— भक्ति, करुणा और एकता के पुल बनाइए।