कहाँ है परमात्मा—मंदिर या मन? मंदिर याद दिलाता है, मन अनुभव कराता है। जब मन शांत, करुणामय और सच्चा होता है, वहीं ईश्वर प्रकट होता है।
मंदिर जाओ, पर मन का दीप रोज जलाओ। मौन, सेवा और मुस्कान से भीतर उजाला करो। हर क्षण दया रखो, हर कर्म ईमानदार बनो।
कहाँ है परमात्मा—मंदिर या मन? मंदिर याद दिलाता है, मन अनुभव कराता है। जब मन शांत, करुणामय और सच्चा होता है, वहीं ईश्वर प्रकट होता है।
मंदिर जाओ, पर मन का दीप रोज जलाओ। मौन, सेवा और मुस्कान से भीतर उजाला करो। हर क्षण दया रखो, हर कर्म ईमानदार बनो।