वैकुंठ की झलक मन में शांति जगाती है। दिव्य प्रकाश, नील आकाश, अनंत करुणा बहती है। नारायण धाम की कल्पना भक्ति की सुगंध है।
शास्त्र इसे निर्भय आनंद का घर कहते हैं। सेवा और दया, वहां पहुंचने की सीढ़ी हैं। आज से प्रेम, सत्य, धैर्य जियो; अपना वैकुंठ रचो।
वैकुंठ की झलक मन में शांति जगाती है। दिव्य प्रकाश, नील आकाश, अनंत करुणा बहती है। नारायण धाम की कल्पना भक्ति की सुगंध है।
शास्त्र इसे निर्भय आनंद का घर कहते हैं। सेवा और दया, वहां पहुंचने की सीढ़ी हैं। आज से प्रेम, सत्य, धैर्य जियो; अपना वैकुंठ रचो।