प्रभु और मानव का रिश्ता सांस जैसा गहरा है। दिखता नहीं, पर हर पल साथ रहता है। कभी वह माता-पिता की ममता बनकर सहलाता है, कभी मित्र की तरह हौसला देता है। मौन में भी वही दिशा दिखाता है।
जब सुख मिलता है, वह कृतज्ञता सिखाता है; जब दुख आता है, वह हिम्मत भरता है। आस्था का अर्थ भागना नहीं, भीतर की रोशनी को जगाना है। भरोसा करें, कदम बढ़ाएँ, राह अपने आप खुलती जाती है।
यह संबंध सेवा, करुणा और कृतज्ञता से मजबूत होता है। हर प्राणी में प्रभु का अंश मानें, तो मन हल्का और प्रसन्न रहता है। छोटी प्रार्थना, सच्ची मेहनत, और ईमानदार मुस्कान भी भक्ति बन जाती है।
संदेश: अपने मन को साफ रखें, कर्म को सधा रखें, और विश्वास को जीवित रखें। कठिन राह में भी प्रभु के इशारे मिलते हैं। उठिए, मुस्कुराइए, और आगे बढ़िए—आप अकेले नहीं हैं।