सूफी नज़र में खुदा का प्यार दिल की खामोशी में गूँजता है। हर सांस में नूर, हर नज़र में करम। दया जहाँ, वही दरगाह।
जब हम प्रेम बनते हैं, दीवारें गिरती हैं। मन हल्का, राह रोशन। अपना पराया मिटे, बस अपनापन बचे। आज से प्यार जियो, रोशनी बाँटो।
सूफी नज़र में खुदा का प्यार दिल की खामोशी में गूँजता है। हर सांस में नूर, हर नज़र में करम। दया जहाँ, वही दरगाह।
जब हम प्रेम बनते हैं, दीवारें गिरती हैं। मन हल्का, राह रोशन। अपना पराया मिटे, बस अपनापन बचे। आज से प्यार जियो, रोशनी बाँटो।