वेद-पुराण कहते हैं: भगवान एक भी, अनेक भी। साकार में लीला, निराकार में निःशब्द प्रकाश। हर रूप में प्रेम, न्याय और करुणा की छाया।
रहस्य यह: जैसा भाव, वैसी अनुभूति। भीतर जागे तो बाहर मार्ग दिखे। आज ही सद्भाव, सेवा और सत्य से अपना प्रकाश जलाओ।
वेद-पुराण कहते हैं: भगवान एक भी, अनेक भी। साकार में लीला, निराकार में निःशब्द प्रकाश। हर रूप में प्रेम, न्याय और करुणा की छाया।
रहस्य यह: जैसा भाव, वैसी अनुभूति। भीतर जागे तो बाहर मार्ग दिखे। आज ही सद्भाव, सेवा और सत्य से अपना प्रकाश जलाओ।