वृंदावन की रासलीला प्रेम का उत्सव है। यह अहंकार मिटाकर समरसता सिखाती। हर हृदय कृष्ण बन, करुणा में नृत्य करता है।
आज के जीवन में इसका अर्थ है संग-साथ। एक-दूसरे को स्थान दें, हाथ थामें। मन को मधुर, कर्म को करुणामय बनाएं। हर कदम रास बने, हर दिल वृंदावन बने!