हर धर्म में ईश्वर का स्वरूप अलग दिखता है। कहीं वह निराकार प्रकाश है, कहीं करुणामय माता-पिता, कहीं मित्र, गुरु, या प्रकृति का स्पंदन।
पर सच यही है: सभी परंपराएं प्रेम, दया, एकता सिखाती हैं। हम जिस राह से जाएं, मंज़िल भीतर की शांति है। चलो, भेद नहीं, अनुभूति बढ़ाएं।