धूल भरे पथ पर निकला, मन हल्का। हर तीर्थ पर शान्ति ने मुझे थामा। घंटियों की ध्वनि में डर पिघला। कदम थकते, मन नया जन्म पाता।
अजनबी मुस्कानें, प्रसाद-सी उम्मीदें। रास्ता छोटा, आस्था बड़ी। सेवा में अहं गलता, दृष्टि साफ। आज ही चलो, बदलकर लौटो; भीतर दीप जलाओ।