माखनचोर कृष्ण की बाल लीलाएँ गाँव में हँसी भर देतीं। नटखट कदम, मुरली की तान, नन्ही आँखों की चमक। यशोदा की डाँट भी प्यार बन जाती।
इन्हीं खेलों में वही मुकुंद दिखता है, जो दुख मिटाए। संदेश: मासूम खुशी बाँटें, सत्य पर डटे रहें, और करुणा से दुनिया सँवारें।