महादेव के पंचमुखी स्वरूप का गूढ़ अर्थ

महादेव का पंचमुखी स्वरूप केवल मूर्ति नहीं, एक जीवंत संदेश है। पाँच मुख पाँच दिशाओं, पाँच तत्वों और जीवन के पाँच आयामों का संकेत देते हैं। यह रूप हमें बताता है कि सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह, सब कुछ भीतर ही घटता है—बस दृष्टि जगाने की देर है।

सद्योजात सृजन की कोमल चमक है, जो हर सुबह नई आशा जगाती है। वामदेव प्रेम और संरक्षण का भाव, रिश्तों में मधुरता लाता है। अघोर भय को रूपांतरण में बदलकर साहस देता है; तत्पुरुष ध्यान की शांति से भीतर के क्रम को सुदृढ़ करता है। ईशान ज्ञान का शिखर है, जो दिशा, विवेक और करुणा देता है।

व्यवहार में ये पाँच चेहरे पाँच अभ्यास बनते हैं: हर दिन छोटा आरंभ, संबंधों में करुणा, संकट में निर्भयता, दिनचर्या में अनुशासन, और निर्णयों में विवेक। श्वास-साधना करें, सेवा करें, क्षमा करें, धैर्य रखें, सीखते रहें। अपने भीतर के शिव को जगाइए—मन निर्मल होगा, कर्म समर्थ होंगे, और पथ प्रकाशित होगा; आज ही संकल्प लें: मैं सकारात्मक, सजग और साधनाशील रहूंगा।

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