इस मंदिर से मन तक, भगवान की यात्रा घंटियों में उठती है, हर दीपक कहता है, लौटो भीतर।
यह राह पत्थर से नहीं, प्रेम से पूरी होती है। शांति का दरवाज़ा मन में खुलता है। आज से, हर सांस में भगवान को पहचानें।
इस मंदिर से मन तक, भगवान की यात्रा घंटियों में उठती है, हर दीपक कहता है, लौटो भीतर।
यह राह पत्थर से नहीं, प्रेम से पूरी होती है। शांति का दरवाज़ा मन में खुलता है। आज से, हर सांस में भगवान को पहचानें।