भगवान पर समकालीन साहित्य की नई धारा

भगवान पर समकालीन साहित्य की नई धारा। लेखक ईश्वर को रोज़मर्रा की धड़कनों में देखते हैं। सवालों संग मुस्कान, आस्था अब संवाद बनती है।

विविधता, करुणा, सहअस्तित्व को खुला स्वर मिलता है। कहानियाँ भीतर उजाला, साझा जिम्मेदारी जगाती हैं। चलो, प्रेम चुनें, सवाल निभाएँ, उम्मीद से बढ़ें!

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