कहते हैं भगवान दूर नहीं, हमारे भीतर ही रहते हैं। उनसे हमारा अदृश्य संवाद शब्दों से नहीं, भावों से होता है। जब हम थक जाते हैं, डरते हैं या खुश होते हैं, तब दिल की गहराई में कोई कोमल आवाज हमें संभालती है। यही आवाज हमें आगे बढ़ने की हिम्मत देती है।
यह संवाद शोर में नहीं, सन्नाटे में साफ सुनाई देता है। सुबह की ताजी हवा, मंदिर की घंटी, माँ का स्पर्श, बच्चे की हँसी—सब संदेश बन जाते हैं। आँखें बंद करें, लंबी सांस लें, और देखें कैसे मन शांत होकर उत्तर सुनने लगता है।
हम भगवान से प्रार्थना, कृतज्ञता और सेवा के जरिए बात करते हैं। जवाब अक्सर शांति, स्पष्टता और सही अवसर के रूप में लौटता है। बाधा केवल हमारी जल्दबाज़ी और शंका है; धैर्य रखें, छोटे-छोटे अच्छे कर्म करें, संकेत अपने आप दिखेंगे।
प्रेरक संदेश: जब मन शांत, श्वास धीमी और इरादा सच्चा हो, तो रास्ता खुद चमक उठता है। आज से हर सुबह दो मिनट मौन बैठें—देखें, भगवान आपके भीतर से कितना सुंदर उत्तर देते हैं। यही आपकी सच्ची ताकत है।