भक्ति बनाम कर्म क्या कहता है भारतीय दर्शन

भारतीय दर्शन कहता है: भक्ति और कर्म विरोधी नहीं। भक्ति हृदय को निर्मल करती है। कर्म जीवन और समाज को सँवारता है।

जब प्रेम से कर्म होता है, वही पूजा बनता है। नीयत पवित्र, कदम दृढ़—यही मार्ग। आज ही श्रद्धा से जियो, कर्मठ बनो, सफल बनो!

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