सुबह की ओस बताती है, हर पत्ती में ईश्वर मुस्कुराते हैं। मिट्टी की खुशबू आशा जगाती है, हरी राहें हमें आगे बढ़ाती हैं।
पेड़ों की छांव करुणा सिखाती है, नदी का बहना धीरज सिखाता है। आओ, पेड़ लगाएँ, प्रकृति बचाएँ, हर दिन हरियाली बढ़ाएँ, यही सच्ची पूजा है!
सुबह की ओस बताती है, हर पत्ती में ईश्वर मुस्कुराते हैं। मिट्टी की खुशबू आशा जगाती है, हरी राहें हमें आगे बढ़ाती हैं।
पेड़ों की छांव करुणा सिखाती है, नदी का बहना धीरज सिखाता है। आओ, पेड़ लगाएँ, प्रकृति बचाएँ, हर दिन हरियाली बढ़ाएँ, यही सच्ची पूजा है!