समुद्र मंथन में घोर विष निकला। संसार बचाने शिव ने दुनिया हेतु पिया। विष कंठ में ठहरा, कंठ नील हुआ।
इसलिए भोलेनाथ नीलकंठ कहलाए, करुणा के देव। संदेश: संकट में शांति बनें, सेवा करते रहें। क्रोध-भय को थामें, प्रेम से जग संवारें।
समुद्र मंथन में घोर विष निकला। संसार बचाने शिव ने दुनिया हेतु पिया। विष कंठ में ठहरा, कंठ नील हुआ।
इसलिए भोलेनाथ नीलकंठ कहलाए, करुणा के देव। संदेश: संकट में शांति बनें, सेवा करते रहें। क्रोध-भय को थामें, प्रेम से जग संवारें।