पहले मन सवालों से भरा था। ईश्वर दूर, तर्क पास लगता था। पर जीवन के स्पर्श ने जिज्ञासा को नम्रता में बदला।
अब आस्था अंधी नहीं, अनुभव से उजली है। अंदर शांति, बाहर करुणा बहती है। हार मत मानो, भीतर का प्रकाश तुम्हें राह दिखाएगा।
पहले मन सवालों से भरा था। ईश्वर दूर, तर्क पास लगता था। पर जीवन के स्पर्श ने जिज्ञासा को नम्रता में बदला।
अब आस्था अंधी नहीं, अनुभव से उजली है। अंदर शांति, बाहर करुणा बहती है। हार मत मानो, भीतर का प्रकाश तुम्हें राह दिखाएगा।