इस ध्यान में शांति से बैठें, साँस महसूस करें। मन में सरल मंत्र दोहराएँ। कृतज्ञता जगाएँ और भीतर झांकें। विचार आते-जाते बादलों-से देखें।
हृदय में उजाला कल्पना करें। करुणा और सेवा की चाह जगाएं। नियमित अभ्यास से भीतर की आवाज साफ होगी। आज से एक मिनट बैठें; ईश्वर भीतर मिलेंगे!