शांत बैठें, धीमी साँस लें। ध्यान को हृदय पर टिकाएँ। मन में कृतज्ञता जगाएँ।
एक सरल मंत्र दोहराएँ, और मौन सुनें। जब विचार थमें, भीतर की उजास पहचानें। यहीं ईश्वर-स्पर्श है; प्रेम बिखेरें। आज से, रोज़ पाँच मिनट, भीतर उतरें!
शांत बैठें, धीमी साँस लें। ध्यान को हृदय पर टिकाएँ। मन में कृतज्ञता जगाएँ।
एक सरल मंत्र दोहराएँ, और मौन सुनें। जब विचार थमें, भीतर की उजास पहचानें। यहीं ईश्वर-स्पर्श है; प्रेम बिखेरें। आज से, रोज़ पाँच मिनट, भीतर उतरें!