दर्द हमें रोकता नहीं, सिखाता है। पीड़ा के बीच मन धीमे-धीमे मजबूत होता है। तभी हम करुणा को गहराई से पहचानते हैं।
ईश्वर की करुणा, जैसे शांत रोशनी, भीतर उतरती है। वह आशा जगाती है और नई राहें दिखाती है। डटे रहो; हर अँधेरा, करुणा से उजाला बनता है।
दर्द हमें रोकता नहीं, सिखाता है। पीड़ा के बीच मन धीमे-धीमे मजबूत होता है। तभी हम करुणा को गहराई से पहचानते हैं।
ईश्वर की करुणा, जैसे शांत रोशनी, भीतर उतरती है। वह आशा जगाती है और नई राहें दिखाती है। डटे रहो; हर अँधेरा, करुणा से उजाला बनता है।