त्योहारों में प्रभु की झलक परंपरा से झरती है। दीए, रंगोली, भजन हमें जड़ों से जोड़ते हैं। हर रस्म के पीछे प्रेम और कृतज्ञता है।
अर्थ यही कि साथ मिलकर दिल रोशन करें। साझेदारी, करुणा और सेवा से उत्सव खिलते हैं। आज से प्रेम, सेवा और आशा फैलाएँ।
त्योहारों में प्रभु की झलक परंपरा से झरती है। दीए, रंगोली, भजन हमें जड़ों से जोड़ते हैं। हर रस्म के पीछे प्रेम और कृतज्ञता है।
अर्थ यही कि साथ मिलकर दिल रोशन करें। साझेदारी, करुणा और सेवा से उत्सव खिलते हैं। आज से प्रेम, सेवा और आशा फैलाएँ।