गंगा का शिव की जटाओं में अवतरण

भागीरथ की गहन तप से गंगा पावन उतरी धरा पर। शिव ने अपनी जटाओं में धारा को सहज संभाला। पृथ्वी को नई शीतलता मिली।

वेग बना सौम्य, आशीष बनकर बहा। कथा सिखाती है: भीतर शिव जगाओ, प्रवाह को सेवा बनाओ।

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