कैलाश की चोटी से उठती शांति बुलाती है। हवा में मंत्र-सी ध्वनि, भीतर उजाला। साधना में बैठो, सांसें लय पकड़ें।
अहं शांत हो, करुणा खिलती जाए। विचार हल्के, कदम स्थिर, दृष्टि निर्मल। आज ही एक पल मौन चुनो: तुम्हारी आंतरिक यात्रा यहीं से प्रारंभ।
कैलाश की चोटी से उठती शांति बुलाती है। हवा में मंत्र-सी ध्वनि, भीतर उजाला। साधना में बैठो, सांसें लय पकड़ें।
अहं शांत हो, करुणा खिलती जाए। विचार हल्के, कदम स्थिर, दृष्टि निर्मल। आज ही एक पल मौन चुनो: तुम्हारी आंतरिक यात्रा यहीं से प्रारंभ।