कृष्ण की बांसुरी का जादू

कृष्ण की बांसुरी का जादू केवल धुन नहीं, एक स्पर्श है जो दिल तक पहुँचता है। जब वह राग छेड़ते हैं, हवा में शांति घुल जाती है और मन की उलझनें ढीली होने लगती हैं। ब्रज की गलियों से लेकर उजड़े मन तक, वह स्वर जैसे रोशनी के धागे बुनते हैं। ध्यान हो या सवेरे की पूजा, उस बांसुरी की गूँज जीवन में कोमलता भर देती है।

किंवदंतियाँ कहती हैं कि गोपियाँ सब कुछ भूल कर उस तान की ओर खिंच आती थीं। यह खिंचाव मोह का नहीं, प्रेम और करुणा का था, जो हर जीव में एक जैसा धड़कता है। जब हम स्वयं को सुनते हैं, तो भीतर भी वही मधुरता मिलती है। उस क्षण अहं छोटा पड़ जाता है और संबंध बड़े हो जाते हैं।

आज की भागदौड़ में भी यह जादू हमारे काम आ सकता है। हर दिन कुछ पल रुकें, गहरी साँस लें, और मन की बांसुरी को बजने दें। अपने काम को सेवा की भावना से करें, और मुस्कान को धुन बना लें। संदेश सरल है: शोर में भी सुर खोजो, और अपने भीतर के कृष्ण को जगाओ।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top