इस कुरुक्षेत्र की धूल में सारथी कृष्ण मुस्कुराते हैं। वे अर्जुन के मन का अँधेरा हटाते हैं। एक वाणी से दिशा साफ हो जाती है।
आज भी मन में एक कुरुक्षेत्र है। संघर्ष आएँ, पर अपना धर्म थामें। कर्म करें, भरोसा रखें। अपने भीतर के कृष्ण को जगाएँ, आगे बढ़ें!
इस कुरुक्षेत्र की धूल में सारथी कृष्ण मुस्कुराते हैं। वे अर्जुन के मन का अँधेरा हटाते हैं। एक वाणी से दिशा साफ हो जाती है।
आज भी मन में एक कुरुक्षेत्र है। संघर्ष आएँ, पर अपना धर्म थामें। कर्म करें, भरोसा रखें। अपने भीतर के कृष्ण को जगाएँ, आगे बढ़ें!