ईश्वर की खामोशी शून्य नहीं, कोमल बोल है। धीमे मन से सुनो, डर पिघलता है। रुककर, सांस गिनो, भीतर उजाला खिलता है।
यह मौन हमें सही राह बताता है। प्रश्न रखो, स्वीकार करो, संकेत पहचानो। आज से एक मिनट मौन साधो; उत्तर भीतर उगेंगे।
ईश्वर की खामोशी शून्य नहीं, कोमल बोल है। धीमे मन से सुनो, डर पिघलता है। रुककर, सांस गिनो, भीतर उजाला खिलता है।
यह मौन हमें सही राह बताता है। प्रश्न रखो, स्वीकार करो, संकेत पहचानो। आज से एक मिनट मौन साधो; उत्तर भीतर उगेंगे।