शिव में अघोर से करुणा तक, निर्भीकता और मधुरता, दोनों साथ धड़कते हैं। यही समत्व सृष्टि का संतुलन है।
हम भी भीतर दृढ़ बनें, बाहर दयालु रहें, साहस से सच कहें, और प्रेम से दुनिया सँवारें। यही शिव की प्रेरणा है।
शिव में अघोर से करुणा तक, निर्भीकता और मधुरता, दोनों साथ धड़कते हैं। यही समत्व सृष्टि का संतुलन है।
हम भी भीतर दृढ़ बनें, बाहर दयालु रहें, साहस से सच कहें, और प्रेम से दुनिया सँवारें। यही शिव की प्रेरणा है।